यहां शुरू हुआ विश्वप्रसिद्ध लोकरंग उत्सव, यहां दिखेगी देश-विदेश की कला एवं संस्कृति
मध्यप्रदेश की राजधानी में विश्व प्रसिद्ध लोकरंग उत्सव (39th National Folklore Festival)शुरू हो गया। हर बार की तरह देशी-विदेशी कलाकार अपनी संस्कृति की झलक पेश करने आए हैं। यह उत्सव 26 जनवरी से 30 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है।
भोपाल में 39वें राष्ट्रीय लोकरंग समारोह का शुभारंभ हो गया। रवींद्र भवन परिसर में राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने इसका उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। इस मौके पर संत शिरोमणि रविदास के जीवन, वाणी पर आधारित नृत्य नाटिका का प्रस्तुती करण किया गया। संस्कृति विभाग के इस समारोह में पारंपरिक लोक नृत्य, लोक गायन-वादन, स्थानीय शिल्प और देशी व्यंजनों का भी लुत्फ उठाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आज गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और धर्मेंद्र सिंह लोधी के साथ भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित 39वें राष्ट्रीय समारोह 'लोकरंग' के शुभारंभ कार्यक्रम में सहभागिता की। साथ ही गणतंत्र दिवस समारोह में उत्कृष्ट परेड प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों व झांकियों के पुरस्कारों का वितरण कर शुभकामनाएं दीं।
यादव ने आगे कहा कि हमारी संस्कृति की विशेषता वसुधैव कुटुंबकम की. हमारी संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखती है. अनेकता में एकता भारत की विशेषता है। हमारे देश में हर त्यौहार और पर्व आनंद और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। लोकरंग कार्यक्रम हमारे आनंद और उल्लास का प्रतीक है।
कई राज्यों के ग्रामोद्योग
ग्रामोद्योग में माटीकला की सामग्री, जूट, बैतबाँस, लकड़ी के फर्नीचर, चमड़े के बेग, बेल्ट, पर्स, विन्ध्यावैली ब्रांड की अगरबत्ती, शेम्पू और सेनेटाईजर, शुद्ध एवं प्राकृतिक मसाले, शहद, अचार, पापड़, आटा, बेसन, दलिया आदि भी लाए गए हैं।
कई राज्यों की साड़ियों के स्टाल लगे
इसमें खादी वस्त्र, मलबरी सिल्क, मसलिन खादी, भागलपुरी सिल्क, मटका सिल्क, कोसा सिल्क की साड़ियां एवं कपड़ा, शॉल, सूट एवं सभी प्रकार के खादी वस्त्र के रेडीमेड गारमेंट्स, लेडीज कुर्ते के स्टाल लगे हैं।
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