मरीजों के दिल का दर्द बढ़ा रही हमीदिया की तीन दिन से बंद कैथ लैब
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल से संबद्ध हमीदिया अस्पताल में बीते तीन दिन से कैथलैब बंद पड़ी है। जिसके चलते एंजियोप्लास्टी व एंजियोग्राफी के लिए वेटिंग में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही नहीं कई मरीज इस समस्या के चलते निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च कर इलाज कराने को मजबूर हैं। इस समस्या की वजह पुराने भवन का टूटना है। प्रबंधन का कहना है कि कैथ लैब का मेंटेनेंस किया जा रहा है। दो दिन में यहां दिल के मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा।
नए भवन में कैथ लैब के लिए जगह क्यों नहीं
कैथ लैब बंद होने पर प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसमें से एक बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल के बहुमंजिला दो नए भवन ब्लॉक 1 और ब्लॉक 2 में कैथलैब के लिए व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इस पर कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि प्रबंधन को इस समस्या से पहले भी सूचित किया गया था। लेकिन समय रहते सही फैसले नहीं लिए गए। यही नहीं जब नए भवन में विभागों के लिए वार्डों का बंटवारा हो रहा था तब प्रभावशाली एचओडी ने जरूरत से ज्यादा जगह हथिया ली थी। जिससे पूरी प्लानिंग प्रभावित हुई।
ब्लॉक वन में मरीज को कैथलैब पहुंचाने के लिए एंबुलेंस
कार्डियोलाजी विभाग नए भवन ब्लॉक वन की तीसरी और 11 मंजिल पर है। जबकि कैथलैब और ओपीडी पुराने भवन में संचालित हो रही है। पुराने भवन का पीछे का हिस्सा टूटना शुरू हो गया है। जिससे इस क्षेत्र में धूल ही धूल रहती है। ऐसे में मरीजों को ब्लॉक वन से लैब तक लेकर जाने के लिए पुराने ट्रॉमा भवन और ओपीडी की तरफ से लेकर जाना पड़ेगा। यह रास्ता लंबा है। ऐसे में मरीजों को लाने ले जाने के लिए एक एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही है।
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मरीजों को किसी तरह की समस्या नहीं होने दी जाएगी। सभी कार्य तय प्लानिंग के साथ किए जा रहे हैं। नए ओपीडी ब्लॉक में कैथलैब के लिए जगह आवंटित की गई है।
-डॉ. आशीष गोहिया, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल
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