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वेस्ट वाटर से बचा रहे पेड़-पौधे और फुलवारी

भोपाल. वेस्ट वाटर का बेस्ट यूज कर शहर में कई स्थानों पर हरियाली और फुलवारी बनाए रखने में किया जा रहा है। इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। जमीनी स्तर के इस प्रयोग से आगे और भी अच्छे परिणाम आने की संभावना दिखाई दे रही है।


कोलार रोड पर विश्वजीत दुबे बाबा ने लक्ष्मी परिसर-2 विकसित किया है। इस परिसर में लगभग 60-70 पेड़-पौधे लगे हुए हैं। इनकी सिंचाई के लिए विश्वजीत दुबे वेस्ट वाटर को यूज करते हैं। कोलार रोड की ही प्रखर होम्स, साईं हिल्स आदि कॉलोनीज में वेस्ट वाटर से बड़े पेड़ जिंदा हैं।

जेके हॉस्पिटल रोड पर स्थित सागर प्रीमियम टॉवर में 500 फ्लैट्स है, जिनमें लगभग 2000 लोग रहते हैं। इस परिसर में तीन पार्क है। एसटीपी भी लगा हुआ है, जिससे वेस्ट वाटर को रीसाइकिल करने के बाद सिंचाई की जाती है। एसटीपी रहवासी कल्याण समिति के अध्यक्ष विजयशंकर दीक्षित बताते हैं कि पिछले कुछ समय से एसटीपी बंद होने से सिंचाई नहीं हो पा रही है। इस बारे में बिल्डर से बात चल रही है।

ई-8 की आकाशगंगा कॉलोनी निवासी डॉ. अजीत सलूजा बताते हैं कि शाहपुरा और भरत नगर के बीच ई-8 की 87 नम्बर पहाड़ी वर्ष 1995 तक वीरान थी। पेड़-पौधे नहीं थे। उन्होंने तब से पौधे लगाने और सहेजने का कार्य शुरू किया। इस पहाड़ी पर पानी की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए घर से एक पाइप डालकर पेड़ों तक पानी पहुंचाया।

शाहपुरा छावनी गांव का वेस्ट वाटर एक गड्ढा कर उसमें इक_ा किया, उसके बाद उसमें बूस्टर पम्प डालकर इसी वेस्ट वाटर को लिफ्ट कर एक-एक पेड़ तक पानी पहुंचाया जा रहा है। दो बूस्टर पम्प में एक सीपीए ने प्रदान की है। उनका कहना है कि यदि इस पहाड़ी के क्षेत्र में बरसात का पानी रोकने के लिए सीपीए एक कच्चे डैम की ही व्यवस्था कर दे तो काफी पानी सहेजा जा सकता है, जिससे भूगर्भ जलस्तर तो बढ़ेगा ही, पेड़-पौधों और पक्षियों के लिए पानी पर्याप्त हो जाएगा। वर्तमान में इस पहाड़ी पर बरगद, पीपल, कंज, कचनार, सेमल, नीम, गुलमोहर, बेर, ब्लेरीसीडिया, पापड़ा, आष्टा, अंजन, सावनिया, पल्टाफारम, पलाश आदि के पेड़ हैं।



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