आईटीएमएस से जुर्माने में कानूनी पेंच, गृह विभाग के अधिकारों का इस्तेमाल कर रही निजी आईटी कंपनी

भोपाल. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट (आईटीएमएस) इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए यातायात नियम तोडऩे वालों की पहचान कर जुर्माना वसूली की कार्रवाई में अब कानूनी पेंच सामने आने लगे हैं। इस मामले में नागरिकों की ओर से स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन और निजी आईटी कंपनी के खिलाफ शिकायतें की गईं और जवाब नहीं मिलने की स्थिति में मामले को अब हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी हो रही है। इधर शिकायतों पर हुई अफसरों की समीक्षा बैठक में कई कानूनी पहलू सामने आए हैं। परिवहन कानून तोडऩे के मामले में अर्थदंड और गिरफ्तारी के अधिकार भारतीय दंड संहिता की धारा 177 के तहत गृह विभाग के अधीनस्थ पुलिस सूबेदार और उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी को है जबकि ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी कंपनी ये काम निजी कंपनियों के कर्मियों से करवा रही हैं। गौरतलब है कि आईटीएमएस का काम स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने निजी आईटी कंपनी टेक्नोसेस को दे रखा है। टेक्नोसेस ये काम 17 करोड़ रुपए की लागत पर कर रही है। इसके तहत शहर में 22 चौक चौराहों पर हाई डेफीनेशन कैमरों के सेट लगाकर निगरानी का काम होता है। लाइव मॉनिटङ्क्षरग के लिए गोविंदपुरा स्मार्ट सिटी कंपनी के मुख्यालय में लाइव एलईडी वॉल लगाई गई हैं जहां से कंपनी के कर्मचारी 24 घंटे निगरानी का काम करते हैं। नियम टूटने के मामले में कंपनी अपने स्तर से सीधे संबंधित नागरिक को नोटिस भेज रही है जिस पर विवाद निर्मित हो रहा है।
नागरिक करा सकते हैं एफआईआर
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर शहर में निजी कंपनी की कार्रवाई भी नियमों के तहत अवैधानिक पाई गई है। यातायात व्यवस्था निगरानी का काम ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी कंपनी अपने अपने स्तर पर निजी कंपनियों से करवा रही हैं। क्रेन से गाड़ी उठाने वाले और आईटीएमएस कंट्रोल रूम में बैठने वाले इन कंपनियों के कर्मचारियों का पुलिस वैरिफिकेशन नहीं होता है। कानूनन वाहन को जप्त करने का अधिकार यातायात पुलिस उप निरीक्षक को होता है जिसे अपनी मौजूदगी में ये कार्रवाई पक्षकार को मौके पर बुलाकर करनी होती है। क्रेन के कर्मी खुलेआम बाजार से बगैर सूचना वाहन उठाकर ले जाते हैं और वाहन चालक यहां वहां सूचना के अभाव में भटकता रहता है। कानून के जानकारों की राय में ऐसे मामले में तत्काल एफएआई कराई जा सकती है।
नियमों के पालन का दावा
स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने दावा किया है कि आईटीएमएस सिस्टम कोई भी कानून नहीं तोड़ रहा है। कार्पोरेशन के मुताबिक जारी होने वाले चालान भले ही कंपनी के जरिए बन रहे हैं लेकिन इस पर हस्ताक्षर यातायात पुलिस अधिकारी से करवाए जाते हैं। इस मामले में स्मार्ट सिटी कंपनी एवं नगरीय प्रशासन विभाग के कई अफसरों से चर्चा की गई लेकिन उन्होंने ऑन रिकॉर्ड कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
आईटीएमएस में तकनीकी खामी है, ई-चालान यातायात पुलिस जारी कर सकती है लेकिन अभी इस पर स्मार्ट सिटी कंपनी का नाम दर्ज है जो प्रायवेट कंपनी जारी कर रही है। जप्ती के मामले में भी कम से कम सूचना वाहन मालिक को होनी चाहिए। इस मामले की शिकायत एडीजी यातायात पुरुषोत्तम शर्मा से की है उन्होंने कार्रवाई करने की बात कही है।
अरुण गुर्टू, पूर्व डीजी लोकायुक्त
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