3 थाना क्षेत्रों में 6 ब्लैक स्पॉट, जनवरी से अब तक 50 हादसे, हर हफ्ते ले रहे एक की जान
भोपाल. शहर की तीन ग्रामीण थाना क्षेत्रों के आधा दर्जन ब्लैक स्पॉट लगभग हर सप्ताह एक वाहन सवार की सड़क दुर्घटना में जान ले रहे हैं। ईंटखेड़ी, गुनगा, बिलखिरिया थाना क्षेत्रों में मौजूद इन ब्लैक स्पॉट को सुधारने की कवायद दो साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन अभी तक इन्हें दुरुस्त नहीं किया जा सका। गुनगा मुख्य मार्ग, ईटखेड़ी से विदिशा जाने वाली सड़क एवं बैरसिया राष्ट्रीय राजमार्ग का चौराहा सड़क दुर्घटनाओं के लिए सबसे ज्यादा बदनाम है। यहां 24 घंटे में पांच हजार से ज्यादा भारी वाहन गुजरते हैं जिसकी चपेट में अमूमन हर हफ्ते एक वाहन चालक आ जाता है।
इन स्थानों पर चार पहिया वाहनों की दुर्घटनाएं भी हुई है। ईटखेड़ी, गुनगा, बैरसिया मुख्य मार्ग के अलावा राजमार्ग को जोडऩे वाली ग्रामीण सड़कों पर भी अंधे मोड़ मौजूद हैं जिन पर पीडब्ल्यूडी विभाग ने चेतावनी बोर्ड लगाकर इतिश्री कर ली है। पुलिस पेट्रोलिंग के अभाव में यहां अतिक्रमण भी हुए हैं जिसके चलते वाहन चालकों को अंधा मोड़ पार करने में दिक्कत होती है। तेज रफ्तार की वजह से यहां कई हादसे हो चुके हैं। जनवरी से अभी तक इन तीन थाना क्षेत्रों में 50 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं।
एडीजी ने करवाया था चिह्नित, फिर भी सुधार नहीं
पुलिस ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के एडीजी दिनेश चंद्र सागर ने शहर के ब्लैक स्पॉट का चिह्नित करवाया था। सबसे ज्यादा स्थल ग्रामीण थाना क्षेत्रों में थे। इन स्थलों को सुधारने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग, मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया एवं नगर निगम जैसी संस्थाओं को सौंपी गई थी। बजट की कमी और लॉकडाउन व्यवस्था के चलते पिछले दो साल में यहां कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
और भी कई ब्लैक स्पॉट मौजूद
शहर के अंदर भी अनेक स्थानों पर ब्लैक स्पॉट मौजूद है जहां आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। पुलिस विभाग में बजट की भारी कमी के चलते इन ब्लैक स्पॉट को ठीक करने की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसियों को सौंपी गई है लेकिन किसी भी एजेंसी ने काम नहीं किया है। प्रमुख ब्लैक स्पॉट में होशंगाबाद रोड, बीआरटीएस, बावडिय़ा रेलवे ओवरब्रिज, सावरकर सेतु, राज भवन की ढलान, बाणगंगा चौराहा, पुलिस मुख्यालय की सड़क के अलावा व्यापम चौराहा प्रमुख हैं।
एक्सीडेंटल पाइंट को ठीक करने के लिए सभी विभागों को नियमित निगरानी एवं समीक्षा करनी होगी। विभाग भी अपने स्तर पर चेतावनी स्थलों का चयन कर यहां सुरक्षा इंतजाम करवा रहा है।
डीसी सागर, एडीजी, पीटीआरआइ
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