प्रदर्शन करने वाले नेताओं से भरवाया जाएगा शांति का बॉण्ड
भोपाल. राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह के साथ औद्योगिक क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अनुषांगिक संस्था लघु भारती को आवंटित जमीन मामले में विरोध करने पहुंचे कांग्रेस के नेताओं को अशोका गार्डन थाने आकर शांति समझौते का बॉण्ड भरना होगा। कांग्रेस नेताओं को घोषणा करनी होगी कि वह भविष्य में किसी भी प्रकार से कानून व्यवस्था को नहीं बिगाड़ेंगे एवं इसके एवज में उन्हें थाने में कुछ हजार रुपए का बॉण्ड भी साइन करना पड़ेगा। अशोका गार्डन पुलिस इस मामले में वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर अभी तक दक्षिण पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक पीसी शर्मा, जिला अध्यक्ष कैलाश मिश्रा, गोविंद गोयल, विभा पटेल, राहुल सिंह राठौर, योगेंद्र सिंह चौहान, मोनू सक्सेना सहित अन्य लोगों को नोटिस जारी कर चुकी है। सांसद दिग्विजय सिंह को भी नोटिस जारी किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह ने डीआइजी को चेतावनी दी थी कि यदि प्रशासन एवं पुलिस ने बलपूर्वक मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पक्ष में काम किया तो वह स्वयं निर्माण कार्य को तोड़ देंगे। पुलिस ने इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए नजर रखने की व्यवस्था की है एवं सिंह के साथ मौके पर मौजूद कांग्रेसी नेताओं से भविष्य में शांति बनाए रखने के लिए समझौता पत्र हस्ताक्षरित करवाया जा रहा है।
कमलनाथ, दिग्विजय ने सीएम शिवराज को लिखे पत्र
उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अगल पत्र लिखे हैं। इन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि लघु उद्योग भारती को नियम विरुद्ध किए गए जमीन आवंटन को निरस्त किया जाए।
कमलनाथ ने कहा कि नियम विरुद्ध जमीन आवंटित की गई, अब यहां फलदार वृक्षों का काटा जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य जब यहां कार्यकर्ताओं के विरोध करने पहुंचे तो उन पर बल प्रयोग कर वाटर केनन का प्रयोग किया गया। प्रशासन का इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनहित विरोधी निर्णय का विरोध करती रहेगी। दिग्विजय ने सवाल किया है कि क्या औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक संगठन को जमीन आवंटित करने के पूर्व भूमि उपयोग बदलने की इजाजत ली गई थी। क्या नगर निगम भोपाल से लघु उद्योग भारती ने निर्माण कार्य प्रारंभ करने के पूर्व अनुमति ली थी। क्या हरे-भरे फलदार और छायादार वृक्षों को काटने की वन विभाग, राजस्व विभाग और नगर निगम से अनुमति ली गई थी।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3efDiRj
via
No comments