मास्टर प्लान में देरी से डूब रही लहारपुर डैम क्षेत्र की 700 एकड़ जमीन की मुक्ति की उम्मीद - Web India Live

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मास्टर प्लान में देरी से डूब रही लहारपुर डैम क्षेत्र की 700 एकड़ जमीन की मुक्ति की उम्मीद

भोपाल। मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2031 की लेटलतीफी से लहारपुर डैम अधिग्रहण से मुक्ति की राह देख रही 700 एकड़ जमीन की उम्मीदें भी डूबने लगी हैं। भोपाल मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2031 में भी जमीनी स्थिति के अनुसार लैंडयूज तय करने की बजाय इसे डूब क्षेत्र ही रहने दिया गया था। इन जमीनों से जुड़े करीब 300 किसानों ने ड्राफ्ट सुनवाई में आपत्ति लगाई और उम्मीद थी कि अंतिम प्रारूप में जमीनों को मुक्त कर इनसे जुड़े किसानों को राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि हमने मास्टर प्लान सुनवाई में आपत्ति भी की है। 35 साल से संघर्ष किया जा रहा है।

योजना रद्द, जमीनें डूब में ही
लहारपुर डैम की योजना काफी पहले रद्द की जा चुकी है। डैम में लगाने के लिए करीब दस करोड़ रुपए से खरीदे गए लोहे के गेट भी जर्जर हो गए। संबंधित एजेंसियों ने लिखित में दिया है कि अब डैम की योजना नहीं है। ऐसे में नए ड्राफ्ट में यहां की जमीनों को डूब से बाहर करना था, लेकिन ऐसा नहीं करते हुए, पुराने मास्टर प्लान के आधार पर इसे बने रहने दिया गया।

ये क्षेत्र हैं प्रभावित है
- एम्स से बरखेड़ा वाली रोड लहारपुर जाने वाली सड़क किनारे का क्षेत्र डूब क्षेत्र तय किया गया।
- अमरावतखुर्द, लहारपुर, बाग मुगलिया, बाग सेवनियां, बरखेड़ा पठानी, पिपनियां पेंदे खां गांव की 700 एकड़ जमीन है।
- इसमें 300 किसान प्रभावित हो रहे हैं।
- किसानों की जमीन अधिग्रहण नहीं की, डेम भी नहीं बना और लैंडयूज डूब हटाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
- किसानों ने इसके लिए केंद्र व राज्य के साथ ही संबंधित एजेंसियों को दस्तावेज जमा किए, स्वीकारा कि प्रोजेक्ट समाप्त हो गया है।

इनका कहना
डैम की योजना जब रद्द हो चुकी है तो जमीनों को भी डूब लैंडयूज से बाहर करना चाहिए। हमने मास्टर प्लान सुनवाई में आपत्ति भी की है। 35 साल से संघर्ष किया जा रहा है।
- महेंद्रसिंह परिहार, लहारपुर



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