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एक किस्साः सादगी इतनी कि एक कार भी नहीं थी, नींद के कारण छोड़नी पड़ी सीएम की कुर्सी

भोपाल। हमेशा सफेद कुर्ता और धोती पहनने वाले इस शख्स को सभी 'राजनीति का संत' कहते थे। छोटे कद के बावजूद राजनीति में ऊंचा मुकाम पाने वाले कैलाश जोशी (kailash joshi) को लोग सरल और सहज व्यक्तित्व के लिए भी जानते हैं। उनकी सादगी के बारे में कहा जाता है कि उनके पास एक कार भी नहीं थी, जब 5वीं बार चुनाव जीते तो कार्यकर्ताओं ने चंदा एकत्र करके उन्हें कार गिफ्ट में दे दी थी।

patrika.com पर पॉलीटिकल किस्सों की सीरिज में पेश है कैलाश जोशी से जुड़े दिलचस्प किस्से...।

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14 जुलाई 1929 को कैलाश जोशी मध्यप्रदेश के 14वें मुख्यमंत्री थे, वे पहले गैर-कांग्रेसी सीएम बने थे। इससे पहले जितनी भी सरकारें आई वो कांग्रेस की सरकारें थीं। 26 जून 1977 को शपथ ली थी और 17 जनवरी 1978 तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उन्हें नींद की बीमारी के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में वे दो बार भोपाल से सांसद भी रहे। 24 नवंबर 2019 को भोपाल में उन्होंने अंतिम सांस ली थी।

 

कार भी लोगों ने दी गिफ्ट

कैलाश जोशी की सादगी के चर्चे हमेशा होते थे। उनके पास एक कार भी नहीं थी। 17 मई 1981 को जब वे पांचवी बार विधायक बने तो कार्यकर्ताओं ने कैलाश जोशी का सम्मान किया था। इसी कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी और राजमाता विजयाराजे सिंधिया भी आई थीं। जोशी का सम्मान हुआ और कार्यकर्ताओं ने चंदे से पैसा जुटाकर एक एम्बेसडर कार खरीदी और उसकी चाबी जोशीजी को सौंप दी। वो कार हमेशा उनके पास रही।

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खाने के बेहद शौकीन थे जोशीजी

उनके करीबी बताते हैं कि उन्हें आदिवासियों के घर बनी मक्का की राबड़ी और मूंगफली-गुड़ बेहद पसंद था। कैलाशजी जब भी भमोरी गांव जाते थे, तो कार्यकर्ताओं के साथ हनुमान मंदिर में बैठ जाते थे। यहां स्थानीय लोगों के साथ चर्चा के साथ ही किसी को भी मूंगफली सेंककर लाने और गुड़ लाने को कह देते थे।

 

नींद की बीमारी थी

बताया जाता है कि वे 18 घंटे तक सोने लगे थे। इससे कई नेता परेशान होने लगे थे। जब कोई अफसर सीएम से साइन करवाने के लिए फाइल लेकर जाता था तो वे साइन करते-करते ही सो जाते थे। इस पर विपक्ष मुद्दा बना देती थी। नींद के कारण वे काम पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे। जोशीजी को नींद की बीमारी के कारण पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

26 साल में आ गए थे राजनीति में

कैलाश जोशी 26 साल की उम्र में वे राजनीति में आ गए थे। 1955 में कैलाश जोशी पहली बार देवास जिले की हाटपीपल्या नगर पालिका के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 1962 से निरंतर बागली से भाजपा के विधायक रहे। इससे पहले वे 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना के सदस्य भी रहे।

 

19 माह जेल में रहे

कैलाश जोशी इमरजेंसी के वक्त एक माह तक भूमिगत रहकर काम करते रहे। इमरजेंसी के दौरान वे 19 माह तक मीसा कानून के तहत नजरबंद किया गया था। इसके बाद 1977 को जोशी मध्यप्रदेश के इतिहास में पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। हालांकि 1978 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।


विधानसभा में दिग्विजय को घेरा

1998 के दौर में जब दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी, तब चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस और दिग्विजय सिंह को उनके ही गढ़ में घेरने के लिए कैलाश जोशी मैदान में उतरे थे। तब दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह के सामने चुनाव लड़ा था। लेकिन वे 50 हजार के अंतर से हार गए थे। बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया।

 

करियर पर एक नजर

  • 1951 में भारतीय जनसंघ की स्‍थापना से ही सदस्‍य रहे
  • 1954 से 1960 तक देवास जिला जनसंघ के मंत्री रहे
  • 1955 में हाटपीपल्‍या नगरपालिका के अध्‍यक्ष
  • 1961 से प्रदेश कार्य समिति के सदस्‍य रहे।
  • 1962 से निरन्‍तर बागली क्षेत्र से विधायक रहे
  • 1963 से 1968 तक जनसंघ विधायक दल सचिव
  • 1970 से 1972 तक उप नेता बने।
  • 1972 से 1977 नेता प्रतिपक्ष रहे।
  • 1972 से लगातार कई पदों पर रहे।
  • 28 जुलाई 1975 को विधान सभा के द्वार पर गिरफ्तार
  • 1977 मुख्‍यमंत्री चुने गए।
  • 1978 में अस्‍वस्‍थता के कारण पद त्‍याग दिया।
  • 1980 से 1984 तक भाजपा प्रदेशाध्‍यक्ष
  • उद्योग, विद्युत मंत्री बनाए गए।
  • 1985 में विधान सभा सदस्‍य निर्वाचित
  • 1985 को भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता रहे।
  • 1990 में नौवीं विधान सभा के सदस्‍य और वाणिज्‍य, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्री।
  • 1993 में दसवीं विधान सभा के सदस्‍य।
  • 1993 में भाजपा किसान मोर्चा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष


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