Patrika Impact: नौ महीने बाद आईसीयू से बाहर आयेगा हत्या का आरोपी
भोपाल. हमीदिया अस्पताल में नौ महीने से एडमिट हत्या के आरोपी को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। सामान्य बीमारी के बावजूद मरीज को 9 महीने तक आइसीयू में रखने के मामले में अब मरीज को शिफ्ट करने की तैयारी है।
अस्पताल ने जेल प्रबंधन को पत्र लिखकर मरीज को एम्स दिल्ली में शिफ्ट करने की सिफारिश की है। पत्र में कहा गया है कि नौ महीने से उसकी हालत में सुधार नहीं हो रहा है। मरीज को सुपर स्पेशलियटी अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। इसलिए जेल प्रबंधन हमें मार्गदर्शन करे कि हम मरीज को या-तो दिल्ली एम्स रेफर करें या फिर निजी खर्चे पर प्राइवेट अंस्पर्ताल में भेज दें।
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हमीदिया अस्पताल अधीक्षक डॉ. लोकेन्द्र दवे ने कहा कि हाइकोर्ट के आदेश हैं कि मरीज को इलाज देना है। चूंकि हमारे अस्पताल में संसाधनों की कंमी है इसलिए दिल्ली एम्स रेफर करने की तैयारी है। एक दो दिन में यहां.से रेफर कर दिया जोएगा।
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ये है मामला
हमीदिया अस्पताल के सर्जीकल वार्ड आठ में भर्ती मरीज का है। यहां एक कैदी अक्टूबर 2020 यानी करीब नौ महीने से भर्ती है। भर्ती पर्चे में मरीज को वीनस थम्बोइम्बोलिस लेफ्ट लोअर लिंब यानि नसों में खून का थक्का जमना और वैरिको सिटीज (पैर की नसों का फूलना बीमारी का उल्लेख किया गया है। दोनों बीमारियां इतनी गंभीर नहीं है कि किसी मरीज को इतने लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़े।
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जेल से बचने अस्पताल का उपयोग
अक्सर रसूखदार कैदी को गिरफ्तारी या जेल ही सलाखों से बचने के लिए अस्पताल का उपयोग करते हैं। खुद को बीमार बताकर अस्पताल में एडमिट हो जाते हैं। नियमानुसार बीमार होने पर जेल प्रबंधन कैदी को जेल में फायदा उठाकर यह कैदी लंबे समय तक अस्पताल में पड़े रहते हैं। कई बार बीमारी की गंभीरता के चलते सजा भी कम हो जाती है।
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