15 अगस्त को है नागपंचमी, 38 साल बाद सर्वार्थसिद्धि और रवियोग का संयोग भी है जानिए कैसे करें पूजा
नागपंचमी पर कर्कोटक नाम का कालसर्प योग बना है इसके साथ सर्वार्थसिद्धि और रवियोग भी रहेंगे।
नागपंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। ज्योतिषाचार्य पं प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार इस साल उदय कालिक कुंडली में राह-केतु कर्कोटक नाम का पूर्ण कालसर्प योग बना रहे हैं। इसके कारण नागपंचमी का महत्व और बढ़ गया है। किसी की कुंडली में कालसर्प दोष है तो नागपंचमी के दिन पूजा करने से यह दोष दूर हो जाता है। कालसर्प दोष दूर करने के लिए यह दिन बहुत खास माना जाता है। इस दिन 9 नागों की पूजा और ऊँ नम: शिवाय का जाप करना फलदायी होता है। इसके अलावा इस दिन रुद्राभिषेक करने से भी कुंडली का कालसर्प दोष दूर हो जाता है।
आजादी के बाद दूसरी बार 15 अगस्त को मनेगी नागपंचमी, ग्रहों की स्थिति भी रहेगी खास -
पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार इस बार नागपंचमी 15 अगस्त बुधवार को हस्त नक्षत्र, साध्य योग एवं कन्या राशि के चंद्रमा के विद्यमान रहते मनाई जाएगी। इस दिन बुधवार को हस्त नक्षत्र का होना सर्वार्थसिद्धि योग बनाएगा। कालसर्प दोष के निवारण की पूजा करने का यह दिन खास रहेगा। संयोग से बुधवार के दिन बुध की राशि में चंद्रमा की साक्षी में इस तरह के योग के अंतर्गत नागपंचमी का होना उत्तम माना गया है। इसके चलते सूर्य, राहु, बुध का कर्क राशि में गोचर करने से और उदय कालिक कुंडली में कर्कोटक कालसर्प योग बनने के कारण ये त्योहार और भी महत्वपूर्ण हो गया है। 15 अगस्त 1980 को भी इस प्रकार के ग्रह योग बने थे।
ऐसे करें पूजा -
नाग पंचमी के दिन सर्प को देवता मान कर पूजा करते हैं। इस दिन पूजा की विशेष विधि होती है। सुबह नहाकर सोने, चांदी या तांबे के नाग-नागिन की मूर्ति बनवाएं। उनकी प्राण प्रतिष्ठा करें। फिर धूप, दीप नैवेद्य आदि से पंचोपचार या षोड़शोपचार पूजा करें। सर्पसूक्त से प्रतिष्ठित नाग-नागिन का दूध से अभिषेक करके पूजन करना चाहिए। इसके बाद उनको किसी मंदिर के शिवलिंग पर चढ़ा देना चाहिए। ऐसा न कर पाएं तो धातु के नाग-नागिन को नदी में बहा दें।
No comments