निगम ने 4 दिन में 225 कुत्ते पकड़े, वैक्सीनेशन को एक भी नहीं पहुंचे सेंटर
भोपाल. राजधानी में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। नगर निगम ने धरपकड़ तेज कर दी है। लेकिन निगम जिन कुत्तों को गलियों-मोहल्लों से पकड़ रहा है वे नसबंदी केंद्र नहीं पहुंच रहे हैं। नगर निगम के आंकड़ों और एबीसी सेंटर्स में कर्मचारियों द्वारा बताई जा रही संख्या में काफी अंतर है। थुआखेड़ा के एबीसी सेंटर पर नगर निगम ने 95 कुत्ते होने का दावा किया। पत्रिका ने यहां का जायजा लिया तो कर्मचारियों ने 25 बताई। उनका कहना था कि हाल ही में पकड़े कुत्ते यहां नहीं आए। सेंटर्स में जो कुत्तें हैं उनमें अधिकतर पालतू हैं जिन्हें लोग वैक्सीनेशन के लिए छोड़ गए हैं यही स्थिति आदमपुर और अरवलिया एबीसी सेंटर की भी है।
चार दिन में 225 कुत्ते पकड़े, एबीसी के पिंजरे खाली
चार दिन में नगर निगम के अमले ने करीब 225 कुत्ते पकड़े हैं। इन्हें एबीसी सेंटर्स पर छोडऩे का दावा किया गया। लेकिन थुआखेड़ा और आदमपुर के सेंटर्स के पिंजरे खाली हैं।
एबीसी सेंटर की बढ़ेगी क्षमता
निगमायुक्त फ्रैंक नोबल का कहना है कि एबीसी सेंटर पर रोटेशन में डॉग आते-जाते हंै, इसलिए पिंजरे खाली हैं। उन्होंने कहा एबीसी की क्षमता बढ़ायी जाएगी। बुधवार को निगमायुक्त व महापौर ने संबंधित अफसरों के साथ एबीसी सेंटर का निरीक्षण किया और जगह बढ़ाने के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया।
शहर से सटे क्षेत्र में बाड़े में रखेगें आवारा कुत्ते
आवारा और आक्रामक कुत्तों के लिए नगर निगम बड़ा बाड़ा बनाएगा। इसके लिए जमीन तलाशी जा रही है। महापौर और निगमायुक्त ने इस संबंध में निरीक्षण किया।
ये कहना है जिम्मेदारों का
हर सेंटर पर 80 से 90 डॉग हैं। लगातार यहां कुत्ते पहुंच रहे हैं। शिकायतें तो हैं लेकिन दिक्कत वाली कोई बात नहीं है।
डॉ. एसके श्रीवास्तव, पशु चिकित्सक, नगर निगम
हर साल 7 हजार एंटी रैबीज वैक्सीन के वॉयल की खपत,
हर साल जेपी और हमीदिया अस्पताल में 7 हजार एंटी रैबीज वैक्सीन के वॉयल की खपत होती है। कुत्तों के काटने पर दोनों अस्पतालों में लगभग 11 हजार लोगों को इंजेक्शन लगाए जाते हैं। एक वॉयल में पांच एमएल वैक्सीन होती है। एक बार में एक व्यक्ति को एक एमएल इंजेक्शन लगता है। इसके एक कोर्स में एक व्यक्ति को तीन इंजेक्शन लगते हैं। वहीं पूरे शहर में लगभग 10 से 12 हजार एंटी रैबीज वैक्सीन वॉयल की खपत है। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉग बाइट के कुल मामलों के 70 फीसदी इन्हीं दो अस्पतालों में आते हैं।
निजी में इलाज मंहगा
निजी अस्पतालों में एंटी रैबीज के पूरे कोर्स के तीन से चार हजार का खर्च आता है। इसके अलावा यदि व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो तो उसकी ड्रेसिंग के लिए अलग से चार्ज लिया जाता है।
पालक भी कोर्स को करें पूरा
पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक डॉ. अजय रामटेके के अनुसार कुत्तों और बिल्लियों को पालने वाले लोगों को भी एहतियातन यह कोर्स पूरा करना चाहिए। इसके लिए लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल अभियान भी चलाया जाता है। रैबीज जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करना जरूरी है।
अस्पताल में इंजेक्शन के लिए लंबी कतार
राजधानी में बुधवार को भी विभिन्न क्षेत्रों में करीब 45 लोगों को कुत्तों ने काट लिया। हमीदिया और जेपी हॉस्पिटल में रैबीज के इंजेक्शन के लिए इन्हें आना पड़ा। दोनों ही अस्पतालों में इंजेक्शन के लिए लंबी कतारें देखी गयीं।
आयोग लेगा संज्ञान
कुत्तों के काटने से बच्चे की मौत पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह घटना दिल दहला देने वाली है। इसमें अधिकारी ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि जवाबदार वे ही हैं। इसलिए संबंधित अधिकारियों को नोटिस दे रहे हैं।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/ZwAjskW
via
No comments