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देखें video: थाईलैंड से आए बौद्ध धर्मगुरु बोले- बौद्ध कला भारत की सांस्कृतिक विरासत

भोपाल. चूनाभट्टी के बौद्ध महाविहार में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, उपासक और अनुयायियों ने भाग लिया। इस दौरान बौद्ध धर्म के महत्व प्रकाश डाला। इसमें थाइलैंड, श्रीलंका, वियतनाम, लाओस, भूटान आदि स्थानों से बौद्ध भिक्षुओं ने भाग लिया। इस दौरान विश्व पटल पर बौद्ध परम्परा को लेकर विचार रखे। बौद्ध प्रतिमा के समक्ष बुद्ध वंदनाकार्यक्रम के शुभारंभ मौके पर बौद्ध महाविहार के मुख्य गेट से परिसर में पहाड़ी पर बनी 25 फीट ऊंची बुद्ध प्रतिमा तक श्वेत वस्त्रों में महिलाएं हाथों में पुष्प लेकर खड़ी थीं। बौद्ध भिक्षु और अतिथि जब यहां आए तो रास्ते में फूल बिछाए गए। इसके बाद बुद्ध प्रतिमा के समक्ष बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बुद्ध वंदना, विश्वशांति, मानवता के लिए प्रार्थना, मंगल मैत्री की गई। इस मौके पर भूटान के लामाओ ने चांटिंग की। कार्यक्रम में थाइलैंड से आए धर्मगुरु महाअचान फ्रा विधेस, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, पीसी शर्मा, तपन भौमिक, राहुल कोठारी, किशन सूर्यवंशी सहित अनेक लोग मौजूद थे।

बौद्ध धर्मगुरु ने कहा बुद्ध की शिक्षा आज भी प्रासंगिक

इस कार्यक्रम में थाइलैंड से शामिल हुए बौद्ध धर्मगुरु महाअचान फ्रा ने कहा कि बौद्ध धर्म और बौद्ध कला भारत की सांस्कृतिक विरासत है। इसके होने से ही भारत का सुंदर इतिहास है, जो सदियों से संजोते आ रहे हैं। भगवान बुद्ध संपूर्ण एशिया के ज्ञान भंडार के प्रकाश पुंज कहे जाते हैं। उनकी शिक्षा आज भी प्रासंगिक है। ऐतिहासिक काल में राजाओं ने अपने-अपने तरीकों से इस धर्म और कला को प्रचारित प्रसारित किया। इस पवित्र कला और धर्म के प्रति श्रद्धा रखते हुए इस समय में भी बौद्ध कला से प्रेरणा लेकर भारतीय कला ही नहीं अपितु विश्व की कलाएं आगे बढ़ रही हैं। बौद्ध धर्मगुरुओं को राज्य अतिथि का दर्जा नहीं देने पर जताई नाराजगीकार्यक्रम के दौरान मुख्य संयोजक भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। इस दौरान उन्होंने इस महासम्मेलन में देश विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं को राज्य अतिथि का दर्जा न दिए जाने पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस महासम्मेलन में विभिन्न स्थानों पर धर्मगुरु आए है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि धर्मगुरुओं को राज्य अतिथि का दर्जा नहीं मिला है। इसके साथ ही उन्होंने बौद्ध समाज के लिए जमीन की लंबित मांग को लेकर भी अपने विचार रखे।

बुद्ध जीवन दर्शन पर प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस मौके पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बुद्ध, भीम गीतों की भी प्रस्तुति हुई। इस दौरान संघमित्रा तायवाड़े ने भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी, जिसे देखकर मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इसी प्रकार अनेक कलाकारों द्वारा गीतों की प्रस्तुति दी गई। इस मौके पर अनुयायियों को त्रिशरण पंचशील प्रदान किया गया।



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